2 MIN READ

पश्चिमी देशों से तुलना की जाए तो भारत में विवाहबंधन की नींव भावनिक आधार पर रखी जाती है| इस पवित्र बंधन में केवल इसी जन्म का नही बल्कि आनेवाले कई जन्मों तक साथ निभाने का वचन पति-पत्नी एक दूजे को देते हैं| इतना ही नही बल्कि जीवनसाथी के मृत्यु के पश्चात भी यह रिश्ता टूटता नही है| पर हमने कभी ये सोचा है, कि जीवनसाथी के गुजरने पर जो पीछे रह जाता है उसकी क्या अवस्था होगी?

ऐसी हालातों में वरिष्ठ नागरीकों की स्थिति बहुत करुणाजनक होती है| सेवानिवृत्त हो जाने के बाद आगे क्या करना है इसकी कोई योजना नही होती| बच्चे विदेश या दूर शहर में जाकर बस जाते हैं| जीवनसाथी के अचानक गुजर जाने के कारण उसके साथ जीवन बिताने का सपना टूट जाता है|

वरिष्ठ नागरीकों में अभी तक पुनर्विवाह की संकल्पना को अपनाया नही गया है| इस कारण, ऐसी परिस्थितियों में जो नागरीक अकेले पड गए हैं, उन्हें नैराष्य, शारीरिक बीमारियाँ और मानसिक कमजोरी का सामना करना पडता है|

अब धीरे धीरे, ऐसे अकेले वरिष्ठ नागरीकों के पुनर्विवाह हो रहे हैं| कई बार ऐसे नागरीकों के बच्चे ही अपने अकेले माँ या बाबुजी को दूसरी शादी करने के लिए बढ़ावा देते हैं| वास्तविकता में वरिष्ठ नागरीक खुद इस बात को समझ रहें हैं, की उन को अकेलापन दूर करने के लिए नए जीवनसाथी की जरुरत है|

विवाह की उम्र के नियमों का अवलोकन करने पर हम यह कह सकते हैं की, १९८० के दशक में १८ से २० साल की उम्र में शादियाँ की जाती थीं| १९९० तक ये उम्र २० से २२ साल तक बढ़ गयी और अब तो ३० या ४० की उम्र में भी शादियाँ की जाती हैं| लड़कियाँ पहले घरवालों के दबाव में आकर जल्दी शादी करने के लिए राज़ी हो जाती थी पर अब वे भी जब तक खुदके पैरों पर न खड़ी हों तब तक शादियाँ नहीं करतीं|

जरूर पढ़ें: 70-Year-Old Natubhai Patel on Live-in Relationships and Re-marriages in Older Age

भारतीय समाजव्यवस्था के अनुसार विवाह की उम्र बीत जाने के बाद शादियाँ करना कोई गलत बात नही मानी जाती| परन्तु, अपने जीवनसाथी के गुजरने के पश्चात शादी करने के लिए मंजूरी नही दी जाती| क्यूँकि ‘दूसरी शादी करना मतलब अपने जीवनसाथी की यादों को भुलाना’ ऐसी एक गलत फैमी भारतीयों में पायी जाती है|

जबकि, वरिष्ठ नागरीकों को इसी उम्र में सहारे की जरुरत होती है| उनकी मानसिक अवस्था को युवा पीढ़ी नही समझ पाती| अगर ऐसी परिस्थितियोंमें उन्हे एक जीवनसाथी मिले जिस पर वे निर्भर हो पाएँ तो उनका बाकी जीवन सहज हो जाएगा| उनका अपना, सुख और दुख में साथ देने वाला और कोई नही बल्कि उनका जीवनसाथी ही बन सकता है|  पुनर्विवाह वरिष्ठों के लिए खुशियोंके जीवन की चाबी साबित हो सकता है|

Ask a question regarding जिंदगी की शाम की एक नई शुरुआत: वरिष्ठ नागरीकों के विवाह

An account for you will be created and a confirmation link will be sent to you with the password.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here