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अक्सर पचास साल की उम्र के बाद जोड़ों का दर्द, रूखी त्वचा, किडनी से जुड़े विकार, ह्रदय के ऊतकों की बीमारियां आदि विकार होने पर डॉक्टर ज्यादा पानी पीने का सुझाव देते हैं|

पानी: जीवन की रक्षा करनेवाला अमृत

शरीर की सभी कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए पानी की जरूरत होती है| आपके शरीर में चयापचय की गति पर ऊर्जा का स्तर निर्भर करता है| सुबह के वक्त अच्छी मात्रा में पानी पीने से आपके चयापचय में सुधार आ जाता है और आपके ऊर्जा का स्तर भी बढ़ जाता है|  हमारे शरीर से अनावश्यक चीजें बलगम, मलमूत्र, पसीना आदि से निकलती हैं उनके लिए पानी आवश्यक होता है और शरीर से निकलने वाले पानी की कमी पूरी करने के लिए ज्यादा पानी पीने की भी आवश्यकता होती है|

विज्ञान कहता है कि,  प्रतिदिन में कम से कम ८ ग्लास पानी पीना चाहिए पर हमारे वेदों में लिखा है कि पानी किस तरह से पीना चाहिए ताकि उससे फायदा हो सके न कि हानि| क्या लिखा है वेदों में पानी पीने के बारे में?  

1. पानी बैठकर ही पीना चाहिए

आयुर्वेद के मुताबिक खड़े होकर नहीं बल्कि कही बैठकर पानी पीना चाहिए| खड़े होकर पानी पीने से शरीर में तरल पदार्थों का समतोल बिगड़ जाता है जिसकी वजह से अर्थराइटिस होने की आशंका रहती है| इसके बिलकुल विपरीत आप जब बैठकर पानी पीते हैं तब नर्वस प्रणाली और मांसपेशियां शिथिल अवस्था में होने के कारण आपके शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बना रहता है| बैठकर पानी पीने से आपकी किडनी भी स्वस्थ रहती है| जो लोग किडनी या जोड़ों की बीमारी से परेशान हैं, उन्हें बैठकर पानी पीने की सलाह दी जाती है|

2. पानी धीरे धीरे पीएं

कुछ लोग पानी पीते समय बहुत जल्दबाजी करते हैं| आयुर्वेद में लिखा है, पानी का एक एक घूंट धीरे धीरे पीना चाहिए और बीच बीच में सांस लेते रहना चाहिए| शरीर में ३ प्रकार के दोष होते हैं: वात, पित्त और कफ़| हर प्रकार के दोष में अलग तरीके से पानी पीने की आवश्यकता होती है| वात प्रकृति के लोगों ने भोजन से पहले १ घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए, पित्त प्रकृति के लोगों ने भोजन का पाचन अच्छे रूप से होने के लिए बीच बीच में पानी पीते रहना चाहिए तथा कफ़ प्रकृति के लोगों ने भोजन से पहले पानी पीना चाहिए जिससे उनका पेट भर जाएगा| इस प्रकार से अपनी प्रकृति के अनुसार आयुर्वेद के निर्देश का पालन कर पानी पीने से वजन भी आसानी से कम हो जाएगा|

3. ठंडा पानी न पीए

फ्रिज में ठंडा किया हुआ पानी न पीए| बाहरी वातावरण के तापमान का या फिर उससे भी उष्ण पानी पीना चाहिए| ठंडा पानी पाचन की क्रिया में बाधा डालता है और पेट में जलती हुई आग को बुझा देता है| इसके अलावा ठंडा पानी शरीर के विभिन्न अंगों तक रक्त को पहुंचाने के काम में बाधा डालता है और इसकी वजह से कब्ज की समस्या भी निर्माण होती है| इसके विपरीत हल्का गरम पानी पीने से वजन और कोलेस्टेरोल लेवल नियंत्रण में रहता है| शरीर की रक्तवाहिकाओं की सफाई गरम पानी पीने से होती है जिससे ब्लोकेजेस का खतरा टल जाता है| गर्मियों में मिट्टी के मटके में रखा हुआ पानी पीकर आप अपनी प्यास को बुझा सकते है|

4. प्यास लगने पर पानी पीना चाहिए

जब शरीर को पानी की जरुरत होती है तो आपको प्यास का एहसास होता है| प्यास लगने पर तुरंत पानी पीना चाहिए| ज्यादा पानी पीने से किडनी का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है| हर व्यक्ति के शरीर में पानी की आवश्यकता अलग अलग हो सकती है| इसलिए अपने प्यास के एहसास को पहचान कर फिर पानी पीना चाहिए|

5. प्यास का इशारा समझे

जब शरीर में पानी की मात्रा कम होती है, तब गला और होंठ सूख जाते हैं| साथ ही साथ आपके पेशाब का रंग भी गहरा पीला हो जाता है| सामान्य रूप से ये रंग पानी जैसा होना चाहिए| अगर आपको डिहाइड्रेशन हो रहा है, तो ये लक्षण जरूर दिखेंगे| डिहाइड्रेशन से बचें क्योंकि अत्यधिक डिहाइड्रेशन से आप बेहोश हो सकते हैं|

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6. सुबह का पहला काम: पानी पीना

आयुर्वेद में लिखा है कि, सुबह उठकर पहला काम होता है पानी पीना| इस अभ्यास को ‘उषापान’ कहा जाता है| इससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों का सफाया होता है एवं आपके आंतो की सफाई भी होती है|

7. पानी का संग्रहण तांबे या और चांदी के बर्तन में करें

पानी का संग्रहण तांबे और चांदी के बर्तन में करना चाहिए| इससे पानी में धन भारित आयनों की मात्रा में वृद्धि होती है| ऐसे बर्तनों में रखा हुआ पानी पीने से शरीर के दोष खत्म हो जाते हैं| ताम्बे में एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कार्यक्षम हो जाती है| चांदी भी  एंटीऑक्सिडेंट्स का एक अच्छा स्त्रोत है| यह आंतो की पाचन की क्रिया को सुलभ बनाता है|

पानी सिर्फ एक तरल पदार्थ ही नहीं बल्कि जीवन रक्षा करने वाला अमृत है| आयुर्वेद में लिखे गए सरल निर्देशानुसार पानी पीने से स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाएंगी| मानवी शरीर का अवलोकन करके इन नियमों को बनाया गया है| पीढ़ी दर पीढ़ी यह ज्ञान मनुष्यजाति की भलाई के लिए बांटा गया है|

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