जानें ७ उपाय पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर्स (PTSD) को ठीक करने के 

पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) एक ऐसा विकार है जो कुछ लोगों में विकसित होता है जिन्होंने एक सदमे में डालने वाली, डरावनी या खतरनाक घटना का अनुभव किया है। लगभग सभी ने आघात का अनुभव लिया होगा| पर कई सारे लोग ऐसे आघातों से उभरकर अपना जीवन अच्छी तरह से लेते| कुछ लोग उस सदमे से बाहर नहीं आ पाते और वे तनाव या डर महसूस करना जारी रखते हैं| ऐसी मानसिक स्थिति को पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर कहा जाता है| आइये देखते हैं बुजुर्गों के लिए इस अवस्था से बाहर आने के लिए ७ आसान उपाय: 

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1सम्मोहन 

गंभीर पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर में अक्सर सम्मोहित कर के आघात की स्थितियों, यादों और भावनाओं को फिरसे जगाकर तनाव की स्थिति का सामना करने के लिए मदद की जाती है| इस लिए बार बार अतीत में जाकर व्यक्ति के तनाव या भय को मिटाने के लिए एक्पोजर थेरपी का इस्तेमाल किया जाता है| 

2एक्पोजर और कॉग्निटिव थेरपी

अगर मरीज को अतीत में घटी हुई घटनाओं या हादसों की वजह से जिंदगी पे पछतावा, अपराध की भावना, खुद को कोसते रहना, भविष्य की चिंता की वजह से परेशानी है तो कॉग्निटिव थेरपी का इस्तेमाल किया जाता है| इन उपचारों के दौरान मरीज के साथ बातचीत करके उसे बार बार खुद को माफ़ करने का अवसर दिया जाता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है|

3आई मुव्हमेंट डिसेंसिटाइजेशन एंड रिप्रोसेसिंग 

इस उपचार पद्धति में मरीज के अतीत की यादों से जुड़े किसी चित्र को मरीज के सामने रखा जाता है| फिर आंखे बंद करके उस चित्र को देखकर लगनेवाले डर या तिरस्कार की भावना को मिटाने के लिए चिकित्सक मरीज से बातचीत करता है| कुछ मिनटों में फिर मरीज को आँखे बंद करके उस चित्र के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया जाता है| इस प्रक्रिया को तब तक किया जाता है जब तक मरीज के दिल  में अतीत को लेकर नकारात्मक विचार ख़त्म नहीं होते| 

4पॉज़िटिव थिंकिंग

सकारात्मक विचारों से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मरीज को काउंसिलिंग की जरुरत होती है| एक चिकित्सक की मदद से या परिवार के सदस्यों की मदद से आघात की दर्दनाक यादों को भुलाने के लिए मरीज को पॉजिटिव थिंकिंग के साथ साथ दीर्घ साँस लेकर नई उम्मीद जगाने की आवश्यकता होती है| 

5टॉक थेरपी 

पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर किसी लम्बे समय तक अगर किसी व्यक्ति में हैं, तो उस व्यक्ति के लिए आघात को भुला पाना इतना आसान नहीं होता| उस व्यक्ति को जब डर लगता है तब डर की भावना को भुलाने के लिए टॉक थेरपी के जरिए एक चिकित्सक द्वारा तरीके बताए जाते हैं| 

6दवाइयां 

अगर पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर की वजह से मरीज बहुत बेचैनी महसूस कर रहा है जिसे वो नियंत्रण में नहीं रख सकता तो उसे एंटीडिप्रेसेंट्स दिए जाते हैं| इन दवाइयों की वजह से मरीज को तनाव से मुक्ति और अच्छी नींद आ जाती हैं| यह दवाइयां डॉक्टर की सलाह से लेना ही उचित है| 

7योग और मेडिटेशन (विपश्यना)

योग या मेडिटेशन के जरिए व्यक्ति को शांति का अनुभव होता है| केवल शरीर पर ध्यान देकर कुछ सरल योगासन किए जाते हैं| इससे बहुत ताजगी का एहसास होता है| मेडिटेशन के जरिए मन में आनेवाले बुरे और डरावने विचार दूर किए जा सकते हैं| 

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