जानिये कैसे ८२ वर्षीय परशुराम साधले योग एवं एक्यूप्रेशर से करते हैं बिमारियां दूर

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पचास साल की उम्र में ही जीने की उम्मीद छोड़ने वाले लोगो में “मै सौ साल तक जीऊंगा” ऐसा कहने वाला कोई मिलता है तो उस व्यक्ति के बारे में अधिक जानने की जिज्ञासा को दबाकर नहीं रखा जा सकता|  हम बात कर रहे हैं, परशुराम साधले के बारे में, जो अतीत में हिन्दी भाषा के अध्यापक थे| सिर्फ पूरी तरह से आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि ८२ साल की उम्र में भी दूर बसे शहर में मोटरबाइक खुद चलाकर वे हाल ही में कणकवली से सांगली (१६० किमी) किसी मरीज का इलाज करने के लिए जाकर आए| नौकरी से निवृत्त होने के बाद उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिससे उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया| उनके जिंदगी का उद्देश्य बदल गया और वे एक स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ने के लिए लोगों को प्रेरित करने लगे| परशुराम साधले आज तक कई सारे मरीजों की गंभीर बीमारियों का द्वारा कर चुके हैं|

हैपी एजिंग की ओर से जब उनसे मुलाकात करने का मौका मिला तब एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन जीने की अनूठी प्रेरणा हमें मिली| उन्होंने जो बाते हमसे कही वो सिर्फ भारतीय वरिष्ठ नागरीकों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मनुष्यजाति को भी अपनानी चाहिए|

मधुमेह को दी मात 

रिटायरमेंट के बाद उन्हें एक ऐसी बीमारी का सामना करना पड़ा जो लोगों के और डॉक्टरों के मुताबिक कभी खत्म ही नहीं होती| ‘मधुमेह’ को कभी भगाया नहीं जा सकता ऐसा सबको लगता है परन्तु इस मधुमेह को हराने की प्रेरणा देने वाले योग गुरु रामदेव बाबा कहते हैं, मधुमेह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक शारीरिक अवस्था है| रामदेव बाबा के पास इलाज के लिए जाने के बाद परशुराम साधले खुद ही एक योग प्रशिक्षक बनकर लौट आए|

कुछ नया सीखने के लिए उम्र की पाबन्दी नहीं होती| देवेंद्र व्होरा लिखित एक्यूप्रेशर की किताबें पढ़कर उन्होंने एक्यूप्रेशर से लोगों का इलाज करना सीख लिया| आयुर्वेद में बताए गए कुछ सरल नुस्खों के जरिए उन्होंने नेचरोपैथी को भी उपचार पद्धति में शामिल कर लिया| इस प्रकार मधुमेह की चपेट में जाने से पहले ही उन्होंने मधुमेह को अपनी मुट्ठी में कर लिया|

मरीजों का कैंसर से छुटकारा 

खुद का इलाज कर स्वस्थ बैठने से उन्होंने अन्य मरीजों का इलाज करना उनका सौभाग्य समझा और आज वे किसी डॉक्टर से कम नहीं है| वर्ष २०१२ में उनकी पत्नी पुष्पा साधले को दिल का दौरा पड़ा| उन्होंने ईसीजी रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाया| डॉक्टर ने कहा कि चार दिन पहले ही इन्हे माइल्ड हार्ट अटैक आया था| हॉस्पिटल में एडमिट करने की बजाय परशुराम साधलेने अपनी पत्नी को घर लाया और एक्यूप्रेशर एवं नेचरोपैथी के जरिए उन्हें वापिस तन्दुरुस्त किया| वे कहते हैं कि, हमने हार्ट अटैक को कोई बड़ा विकार समझा ही नहीं और आत्मविश्वास के साथ उसे हराया| इसी प्रकार उन्होंने गूंगापन, ब्लड कैंसर,टीबी, पेट के विकार, लिव्हर की दुर्बलता, शराब और धूम्रपान जैसी आदतें, निद्रानाश, मधुमेह, हाय ब्लड प्रेशर, ह्रदय विकार, गैंगरीन, अस्थमा, स्ट्रोक, पूरी तरह निष्प्राण अंग, गले का कैंसर आदि बीमारियां पूरी तरह से ठीक की है| उन्होंने जिन जिनको ठीक किया वे परशुराम साधले को ‘ईश्वर का दूत’ ही मानते हैं परन्तु परशुराम साधले का ये कहना है कि अगर आप श्रद्धापूर्वक अपने शरीर का ख्याल रखेंगे तो शरीर लम्बे समय तक बिना किसी शारीरिक व्याधि के आपका साथ देगा| अत्यंत गरीब घर से आए हुए इस व्यक्ति ने इसी प्रकार अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया है|

चर्चा के आखरी दौर में उन्होंने २ अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए जिनका हर बुजुर्ग व्यक्ति को लम्बी उम्र पाने के लिए पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है|

लम्बी उम्र करे तय सिर्फ सरल सूत्रों को अपना कर 

1. हर रोज पेट साफ होना जरुरी है| जिस प्रकार भूगर्भ में भरे गैस की वजह से भूकंप आता है, उसी प्रकार पेट में भरे गैस की वजह से हार्ट अटैक आता है|

2. खाना खाने के 1 घंटा पूर्व और 1 घंटा बाद पानी नहीं पीना है| जिस प्रकार हम यज्ञ में पानी नहीं डालते उसी प्रकार पेट की अग्नि को हमें पानी से नहीं बल्कि भोजन से बुझाना चाहिए|

परशुराम साधले ने हमसे खूब बाते की, उन्होंने कहा “मैं अभी भी कटहल और आम के पेड़ पर चढ़कर फल इकट्ठा करता हूँ”| कई योगासन उन्होंने बिना थके करके दिखाए, एक्यूप्रेशर और प्राणायाम के अभ्यास से होने वाले चमत्कारों को साझा किया| हमारे पास आश्चर्य व्यक्त करने के अलावा कोई विकल्प ही न था| इस योग एवं प्राणायाम के साधक को और एक्यूप्रेशर एवं नेचरोपैथी के जरिए चिकित्सा करने वाले वैद्य को मन ही मन में प्रणाम करते हुए हम उनकी अविस्मरणीय कहानियों को मन की टोकरी में समेटकर चल पड़े|

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