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लोपैथी और आयुर्वेद के साथ पिछले कुछ सालों में होम्योपैथी का महत्व भी बढ़ गया है| होम्योपैथी की दवाएं  रुचिकर होती हैं| इनका स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता| होम्योपैथी की खासियत यह है कि, जल्दी ठीक न होने वाली गम्भीर स्वरुप की बीमारियों में भी यह फायदेमंद साबित हुयी है| कैंसर, एचआईवी जैसी बीमारियों में  होम्योपैथी से राहत मिलती है| किडनी की उम्र बढ़ने पर काफी बीमारियों का सामना बुजुर्गों को करना पड़ता है| किडनी से जुडी बीमारियों में भी होम्योपैथी से इलाज संभव है| 

होम्योपैथी की खोज एक जर्मन चिकित्सक, डॉ. क्रिश्चन फ्रेडरिक सैमुएल हैनिमैन (1755-1843), द्वारा अठारहवीं सदी में की गयी थी। भारत में होम्योपैथी की प्रैक्टिस करनेवाले डॉक्टरों की तादाद भी बढ़ती जा रही है| होम्योपैथी की खासियत ये है, कि रोजाना बर्ताव में आनेवाले बदलाव भी इसमें बीमारी के लक्षण के तौर पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं| 

आइये देखते हैं ऐसी कुछ होम्योपैथिक दवाइयां जिनके द्वारा किडनी का इलाज करना संभव है|

1. एपिस मेलिफ़िका: इस होम्योपैथिक दवा का उपयोग किडनी के गम्भीर स्वरुप की बीमारियों में नहीं किया जाता है| इस दवाई का उपयोग तब होता है जब किडनी में हल्का दर्द होता है| इससे पेशाब की मात्रा और कमजोरी में कमी आती है| पेशाब के दर्जे में सुधार आता है, रक्त में एल्ब्युमिन की बढ़ोतरी हो जाती है और मरीज को नींद आती है|

2. आर्सेनिकम:  किडनी की गम्भीर स्वरुप की बीमारियों के हर स्तर में इस होम्योपैथिक दवा का उपयोग होता है|  खासकर ये अल्सर, अधिक प्यास लगना, उदासी, साँस कम पड़ जाना, दस्त और जलोदर के लिए विशेष उपयोगी है| 

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3. फॉस्फरस: किडनी के अल्सर का इलाज  फॉस्फरस नामक एक होम्योपैथिक दवा से किया जा सकता है| शरीर में थकावट, मांसपेशियों में दर्द, अनिद्रा, हाथ पैर ठंडे पड़ जाना आदि पर फॉस्फरस लक्षणीय काम करता है| शरीर में गर्मी महसूस होकर भी पानी पीने की इच्छा न होना, अपने पक्ष में झूठ बोलना आदि बदलाव मरीज के बर्ताव में आते हैं जिनका इलाज फॉस्फरस से संभव है| इसके अलावा विस्मृति, चक्कर आना और सिरदर्द आदि लक्षण भी किडनी की बीमारी में पाए जाते हैं|

4. डिजीटलिस: डिजीटलिस रक्तवाहिकाएं एवं मूत्रमार्ग की कमजोरी को मिटा देती है| शरीर में आमवात की वजह से जो दर्द होता है, उस दर्द में ये दवा फायदेमंद है|

5. ओरम म्यूरिएटिकम: किडनी के गंभीर विकारों में इस दवा का अच्छा उपयोग किया जा सकता है| इन विकारों के लक्षणों के तौर पर अगर चक्कर आना या चिड़चिड़ापन होना पाया जाने पर इस दवाई का उपयोग किया जा सकता है|

6. बेल्लाडोना:  किडनी की सूजन, सिलने या जलने पर जैसे दर्द होता है वैसा दर्द पीठ के निचले कोने में महसूस होना आदि लक्षणों में यह दवाई फायदेमंद साबित होती है|

7. कानवाल्लारिया: हृदयरोग के कारण किडनी के जो विकार होते हैं, उन विकारों से छुटकारा पाने के लिए यह दवाई इस्तेमाल की जाती है| बार बार जलोदर की समस्या होना यह लक्षण पाया जाने पर ही डॉक्टर यह दवाई देते हैं| 

किडनी स्टोन बुजुर्गों में बहुत ही आम समस्या है| किडनी स्टोन होम्योपैथी से पिघल सकता है| आइये देखते हैं कौनसी होम्योपैथिक दवाइयां किडनी स्टोन का इलाज करने में काम आती हैं: 

  1. बर्बेरिस वल्गारिस: बाएं ओर की किडनी का स्टोन पिघलाने के लिए
  2. कैन्थरिस: मूत्रमार्ग में जलन और बून्द बून्द होने वाले पेशाब की समस्या मिटाने के लिए 
  3. कोलोसिंथिस: पेशाब के समय पेट में होने वाले दर्द से राहत के लिए 
  4. ओसीमम कैनम: मतली या उल्टी की वजह से होने वाले दर्द को मिटाने के लिए 
  5. पेन्नीरोयल: बार बार होने वाली पेशाब की समस्या और दाएं ओर की किडनी की पथरी को पिघलाने के लिए   

हालाँकि, इनमे से कोई भी दवाई लेने से पहले एक बार होम्योपैथिक डॉक्टर की जरूर राय लें| गलत दवाई और गलत तरीके से दवाई का सेवन खतरनाक साबित हो सकता है| डॉक्टर की सलाह से दवाइयां लेने पर किडनी के बड़े से बड़े विकार ठीक हो सकते हैं| 

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