बुजुर्गों में क्यों होता हैं एनीमिया?

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शरीर में रक्त का ४० प्रतिशत भाग लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) से व्याप्त होता है| यह कोशिकाएं हर एक अंग तक और उस अंग की हर एक कोशिका तक ऑक्सीजन पहुंचांती हैं| अगर लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी आई तो उस अवस्था को एनीमिया (रक्ताल्पता) कहा जाता है|

एक सर्वेक्षण के जरिए भारत के वरिष्ठजनों में एनीमिया की समस्या को दर्शाया गया है| बेंगलोर (१७.७%), बड़ोदा (५१.६%), चंडीगढ़ (६८.२%) और हरियाणा (८९%) आदि स्थानों पर किए गए इस सर्वेक्षण के अनुसार वरिष्ठजनों में लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा सामान्य मात्रा से कम है|

आइये देखते हैं क्यों होता हैं एनीमिया?

पुरुषों के खून में हर माइक्रोलिटर में ४७-६१ लाख और महिलाओं में ४२-५४ लाख, यह लाल रक्त कोशिकाओं की सामान्य मात्रा है| लाल रक्त कोशिकाओं के कम होने के यानि की एनीमिया के हर व्यक्ति में अलग अलग कारण होते हैं|

1. पोषक मूल्यों की कमी:

फोलिक ऐसिड, आयरन और विटामिन ‘ए’ के सेवन से लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है| यदि इन पोषक मूल्यों का सेवन सालों तक कम मात्रा में किया गया तो यह एनीमिया का प्रमुख कारण बन सकता है| हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, मूंगफली, अंडे, मशरूम, मटर व फलियां, चोकर वाला आटा (छिलके के साथ पीसा हुआ), आलू, दालें, मांस, बाजरा, गुड़, गोभी, शलजम, अनानास आदि खाने की चीजें फोलिक ऐसिड से भरपूर होती हैं| इनका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए| आयरन के सेवन से हीमोग्लोबिन बढ़ता है| अंकुरित दालें आयरन (लोह तत्व) से भरपूर होतीं हैं|  इसमें आप मूंग, सोयाबीन, काला चना और उड़द आदि दालों का सेवन कर सकते हैं। 100 ग्राम अंकुरित दाल में 10.44 मिलीग्रैम लोह तत्व होता है। हररोज सुबह खाली पेट काले चने खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है| ओट्स भी आयरन से भरपूर होते हैं| इसमें फैट की मात्रा अत्यल्प रहती है| पाचन के लिए यह बहुत ही आसान पदार्थ है| सुबह ओट्स का नाश्ता करने के बाद आप भूख लगने पर ताजे फल या ड्रायफ्रूट्स (बादाम, काजू, पिस्ते) आदि का सेवन कर सकते हैं| चुकंदर में भारी मात्रा में आयरन होता है| इसे रोज खाने से लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है| चुकंदर की जड़ों में विटामिन ‘ए’ और ‘सी’ भी होता है| गहरे पीले रंग के फल, खट्टे फल विटामिन ‘ए’ से भरपूर होते हैं| इसके अलावा मूली, गाजर, टमाटर, खीरा हररोज कच्चे रूप में खाने चाहिए| विटामिन ‘ए’ शरीर को संक्रमणों से बचाता है|

2. चाय एवं कॉफी का गलत वक्त पर सेवन:

भोजन के बाद चाय का सेवन न करें| इससे भोजन से मिलनेवाले पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं| ज्यादा ब्लैक टी या ब्लैक कॉफी के सेवन से भी एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है| अगर आपको चाय या कॉफी पीने की आदत है, तो वक्त मिलने पर गुड़ और मूंगफली का सेवन करना चाहिए| इससे हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है|

3. मलेरिया की वजह से एनीमिया:

मादा एनोफिलीज (मच्छर) के काटने की वजह से मलेरिया होता हैं| इस मच्छर के खून में मौजूद मलेरिया फैलानेवाले परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में छिपकर कई गुना बढ़ जाते हैं| इससे खून में लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा तेजी से कम होती है| अगर सही मात्रा में दवाइयां वक्त पर न खाई जाए तो मलेरिया की वजह से होनेवाला एनीमिया जान के लिए खतरा बन सकता है|

4. घाव से अधिक मात्रा में खून बहना:

किसी दुर्घटना की वजह से आए हुए घाव से अगर भारी मात्रा में खून बहे तो शरीर में खून की और साथ ही साथ लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा में कमी आ जाती है| शरीर पर या शरीर के अंधरुनी हिस्से में स्थित अल्सर की वजह से अधिक मात्रा में खून बह जाता है| अगर आपके खेत में हुकवर्म (खून चूसनेवाले कीड़े) काफी मात्रा में हैं, तो आपको नंगे पाँव नहीं चलना चाहिए|

5. महिलाओं में युवावस्था में माहवारी एवं गर्भावस्था:

युवावस्था में माहवारी एवं गर्भावस्था में ज्यादा रक्त के शरीर से निकलने की वजह से एनीमिया होता है| अगर लाल रक्त कोशिकाओं की कमी को पोषक मूल्यों का सेवन कर सामान्य मात्रा में न लाया गया तो वरिष्ठ महिलाओं में एनीमिया की समस्या बढ़ जाती है|

वृद्धावस्था में एनीमिया को नजरअंदाज करने पर जल्दी थकावट महसूस होना, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, पैदल चलनेपर या सीढ़ियों पर चक्कर आना, पैर और हाथों के तलवे ठंडे पड़ जाना, सिरदर्द आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है|

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सन्दर्भ: http://medind.nic.in/ibl/t12/i2/iblt12i2p153.pdf

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