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ये तब होता है जब आप दिन के दौरान थका हुआ या सुस्त महसूस करते हैं। यह आलस आपकी दैनंदिन गतिविधियों में हस्तक्षेप कर सकता है। दो अलग-अलग अभ्यासों के अनुसार, ६५ वर्ष से अधिक उम्र के ५०% से अधिक वरिष्ठ नागरीक अनिद्रा या रात को नींद न आने से पीड़ित हैं, जिससे दिन में सुस्ती महसूस होती है।

अत्यधिक नींद आना कोई बीमारी तो नहीं है लेकिन आमतौर यह किसी अन्य विकार का एक लक्षण साबित हो सकता है। इसका उपचार करने के लिए कौनसी बीमारी की वजह से यह हो रहा है, ये ढूँढना चाहिए| 

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कोई भी स्थिति जो आपके रात की नींद में बाधा डालती है, दिन की अत्यधिक नींद का कारण बन सकती है। कई बार उस व्यक्ति को इस बात का एहसास नहीं होता कि वह दिन में अत्यधिक नींद का शिकार है, परन्तु परिवार के अन्य सदस्यों का इस बात पर ध्यान जाना चाहता है| 

आइये देखते हैं कुछ कारण जिनके परिणामस्वरूप अत्यधिक नींद आती है:

  1. स्लीप एपनिया: स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें आप नींद में कम समय के लिए सांस लेना बंद कर देते हैं। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) सबसे सामान्य प्रकार की स्लीप एपनिया है, जो श्वास नलियों में रुकावट निर्माण होने के कारण होती है। स्लीप एपनिया में लोग नींद में बार-बार उठते हैं क्योंकि शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण उनका मस्तिष्क उनको जगने की सूचना देता है| 
  2. रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (आरएलएस): इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक दिन की नींद आ सकती है, भले ही उस व्यक्ति को यह याद न हो कि रात में बार बार नींद में रूकावट आने की वजह से ये हो रहा है। इसकी वजह से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और मोटापा जैसी अन्य बीमारियां भी हो सकती है| 
  3. रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (आरएलएस): आरएलएस की वजह से आपको आपके पैरों को लगातार हिलाने का मन करता है। ऐसे पैर हिलाते रहने से थोड़ी देर के लिए राहत मिलती है। आरएलएस का कोई निश्चित कारण नहीं है, हालांकि आयरन की कमी कई की वजह से आरएलएस के लक्षण दिख सकते हैं।
  4. नार्कोलेप्सी: नार्कोलेप्सी एक मस्तिष्क से जुड़ा विकार है जो रात की नींद में बाधा नहीं डालता लेकिन, इसकी वजह से दिन में अत्यधिक नींद आ सकती है। इसको अक्सर एक मानसिक विकार मानकर इसपर गलत तरीके से उपचार किए जाते है।
  5. डिप्रेशन: डिप्रेशन आपके नींद के समय में बदलाव लाने के लिए एक प्रमुख कारण है। डिप्रेशन में व्यक्ति या तो बहुत अधिक या बहुत कम सोता है। डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जिसे उचित उपचार की आवश्यकता है। यह आपको रात में जगाए रख सकता है और दिन में अत्यधिक नींद का कारण बन सकता है।
  6. दवा के दुष्प्रभाव: कुछ दवाएँ जो आप अन्य विकारों के उपचार के लिए ले रहे हैं, दिन में अत्यधिक नींद या सुस्ती का कारण हो सकती है। ऐसी दवाएं जो हाई ब्लड प्रेशर, एंटीडिप्रेसेंट्स, एंटीहिस्टामाइन (बंद नाक के इलाज के लिए इस्तेमाल की जानेवाली दवा), एंटीमैटिक ड्रग्स (मतली और उल्टी के इलाज के लिए इस्तेमाल की जानेवाली दवा), एंटीसाइकोटिक्स, एंटी-एंजायटी जैसी सभी दवाएं अत्यधिक आलस या नींद का कारण बनती हैं। अगर ऐसी समस्या आपको दवाओं की वजह से हो रही है तो आपको तुरंत ही इसके बारे में डॉक्टर से बात कर सकते हैं।
  7. बढ़ती उम्र: जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, गहरी नींद आना कम हो जाता है। ५० साल की उम्र के बाद, आपको कम नींद आने लगती है और रात भर जागने में अधिक समय व्यतीत होता है। एक अभ्यास के अनुसार, ५० साल की आयु से गहरी नींद आना कम होता है। ९० साल की उम्र के बाद गहरी नींद आना बंद ही हो जाता है।

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अच्छी नींद आना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, अत्यधिक नींद की वजह से गतिविधियों में कमी और थकान की समस्या हो सकती है। अगर आपको अत्यधिक नींद की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लें| अगर ये समस्या सुलझ गई तो आपका दिन तरोताजा बन जाएगा और दिन में नींद आना बंद हो जाएगा|  

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