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भारत में बुजुर्गों की संख्या दिन-बदिन बढ़ती जा रही है। वरिष्ठ नागरिकों की इस श्रेणी में १०४ दशलक्ष से अधिक लोग आते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, वरिष्ठ नागरीकों की आत्महत्याएं भी बढ़ रही है। हर 5 आत्महत्याओं में से 1 आत्महत्या 60 वर्ष से अधिक उम्र के एक वरिष्ठ नागरीक की हो रही है। डिप्रेशन (अवसाद) और गंभीर शारीरिक बीमारी वरिष्ठों में आत्महत्या के प्रमुख कारण हैं। इनके अलावा, इनमें से कुछ आत्महत्याएँ गरीबी के कारण होती हैं।

बुजुर्गों में डिप्रेशन

डिप्रेशन से पीड़ित वरिष्ठ नागरीक अक्सर द्विध्रुवी विकार (कभी-कभी अवसाद या कभी-कभी अतिउत्साह) और लगातार मूड में बदलाव जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। वरिष्ठ नागरीकों के रोज़मर्रा के जीवन पर डिप्रेशन का बड़ा प्रभाव पड़ता है। उनकी ऊर्जा का स्तर, नींद का समय आदि में बदलाव आता है और जीने में अरुचि निर्माण होती है। ऐसे व्यक्ति रिश्तों और जिंदगी के प्रति उदासीन होते हैं|

हालांकि, कई वरिष्ठ नागरिकों को लगता है कि डिप्रेशन उम्र बढ़ने के कारण होता है, जो कि एक प्राकृतिक नियम है। इसलिए वे इसे अनदेखा करते हैं। निम्नलिखित कारणों से वरिष्ठ नागरिकों की ओर दुर्लक्ष किया जाता है:

  1. कई लोग सोचते हैं कि अवसाद उम्र के कारण होता है
  2. अधिकांश वरिष्ठ नागरीक अकेले रहते हैं और उन पर ध्यान देने वाला कोई नहीं होता
  3. डिप्रेशन कभी-कभी शारीरिक दर्द का कारण बनता है, जिसका कोई भी मेडिकल कारण नहीं होता
  4. वे अपने स्वयं के स्वास्थ्य पर चर्चा करते रहना और स्वयं को ज्यादा महत्व देनाअनुचित समझते हैं।

डिप्रेशन, रिटायरमेंट, परिवार के किसी करीबी सदस्य की मृत्यु या आर्थिक समस्या के कारण भी हो सकता है।

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वरिष्ठ नागरीकों में डिप्रेशन कैसे पहचानें?

निम्नलिखित लक्षणों के आधार पर, बुजुर्गों में डिप्रेशन का निदान किया जा सकता है: 

  • अत्यधिक दुखी होना
  • बिना किसी शारीरिक व्याधि के होने वाला दर्द
  • हर चीज से अलगाव और किसी चीज में दिलचस्पी न होना
  • समाज में किसी के साथ मिलना-जुलना न पसंद करना
  • अचानक वजन बढ़ना या कम होना
  • जीवन के बारे में नकारात्मक सोच और स्वयं को कम महत्वपूर्ण महसूस करना
  • कमजोरी महसूस होना
  • नींद के समय में बदलाव
  • आत्म-सम्मान की कमी
  • व्यवहार या बोलने में धीमापन
  • शराब या ड्रग्स का अत्यधिक सेवन
  • आत्महत्या के विचार
  • थोड़े या ज्यादा समय के लिए स्मृतिभ्रंश
  • स्नान, दवाओं या भोजन को भूल जाना या उससे बचना, और अपने स्वयं के स्वास्थ्य की उपेक्षा करना

यदि कोई वरिष्ठ नागरीक अकेलेपन या जीवन खत्म करने के बारे में बात कर रहे हो, तो इस बात को गंभीरता से लेकर तुरंत ही डॉक्टर से परामर्श करें| उनके डिप्रेशन के दौरान उन्हें आपके सहारे की सख्त जरूरत है। लेकिन भारत में वरिष्ठ नागरीकों के डिप्रेशन को गंभीरता से नहीं लिया जाता| इसके विपरीत, डिप्रेशन से पीड़ित वरिष्ठ नागरीकों को ये कहा जाता है कि, उन्हें दूसरों को खुश करना चाहिए और अनुचित विचारों को दिमाग से निकाल देना चाहिए| परन्तु, डिप्रेशन से पीड़ित वरिष्ठ नागरीक स्वयं के ऊपर नियंत्रण खो देते हैं|

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डिप्रेशन यह बढ़ती उम्र का परिणाम नहीं है बल्कि, अन्य शारीरिक या मानसिक विकारों की तरह, डिप्रेशन को भी चिकित्सा और उपचार की आवश्यकता होती है। डिप्रेशन के बारे में जागरूक होना और उपचार के लिए उचित कदम उठाना महत्वपूर्ण है। ऐसे वरिष्ठ नागरीकों की देखभाल करनेवालों को उन्हें चिकित्सा और उपचार के बारे में जानकारी देनी चाहिए। इससे वे अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात कर सकेंगे। व्यायाम और योग उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उन्हें आत्महत्या से बचाने में मदद कर सकते हैं।

वरिष्ठ नागरीक अपने जीवन के इस पड़ाव पर स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के योग्य हैं। ऐसा जीवन जीने के लिए उनकी सहायता करें।

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