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भारत में ४३.३२ प्रतिशत वरिष्ठजनों को कोई न कोई मानसिक बीमारी है| दुर्भाग्यवश ‘ऐसी मानसिक बीमारी वृद्धावस्था में आती ही है’, ऐसी सोच रखने के कारण भारतीय समाज के लगभग सभी श्रेणियों के लोग मानसिक विकार के लिए मनोचिकित्सक या न्यूरोलॉजिस्ट के पास बुजुर्गों को उपचारों के लिए नहीं ले जाते| और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है| 
 
मानसिक विकार कई प्रकार के हो सकते हैं| कभी ऐसे विकार  याद्दाश्त से, व्यवहार से, तो कभी परेशानी से जुड़े होते हैं| ज्यादातर विकारों के लक्षणों में समानताएं होती हैं| इसीलिए इन लक्षणों के बारे में अच्छी तरह से जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है क्यूंकि कोई ठोस टेस्ट न होने की वजह से लक्षणों के आधार पर ही मानसिक विकार का इलाज करना संभव है| याददाश्त कमजोर होना, व्यवहार में बदलाव आना या परेशान हो जाना इन मुख्य लक्षणों के आधार पर हम मानसिक विकारों को वर्गीकृत कर सकते हैं|  

याद्दाश्त से जुड़े मानसिक विकार

उम्र के साथ साथ मनुष्य की याद्दाश्त कमजोर होती जाती है| याद्दाश्त से भूलने की बीमारियों में डिमेंशिया (स्मृतिभ्रंश), अल्जाइमर रोग, प्रलाप (डलिरियम) आदि बीमारियां सम्मिलित हैं| आइये देखते हैं इनके लक्षणों में क्या अंतर हैं: 
 
 
डिमेंशिया या स्मृतिभ्रंश (Dementia) अल्ज़ाइमर रोग  (Alzheimer’s disease)प्रलाप या डलिरियम (Delirium)  डिप्रेसिव स्यूडोडिमेंशियावृद्धावस्था में कमजोर याद्दाश्त
छोटी छोटी बातें भूल जाना जैसे कि दोपहर में खाने में क्या था याद्दाश्त से जुड़ी समस्याएं जिससे रोजाना के कामकाज करना मुश्किल हो जाता हैभूलने की शुरुआत एकाएक होती है डिप्रेसिव स्यूडोडिमेंशिया (Depressive Pseudodemetia) में मरीज को हाल ही में हुई घटना और बहुत पुरानी घटना में अंतर नहीं समझ आता| पहले यह समस्या 60 या इससे अधिक उम्र के बुजुर्गों में ही देखी जाती थी। स्मार्ट फोन पर चिपके पड़े रहने से अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसे सीधे तौर पर अल्जाइमर भी नहीं कहा जा सकता।





बढ़ती उम्र के साथ याद्दाश्त खोना एक आम बात है| कम उम्र के लोगों को भी कभी कभार हाल ही में देखी हुयी फिल्म, घर के पास की सड़क का नाम जल्दी याद नहीं आता| इसलिए वृद्धावस्था में कमजोर याद्दाश्त चिंता की बात नहीं है| फिर भी अगर ऊपर लिखे गए लक्षण किसी बुजुर्ग व्यक्ति में पाए गए तो तुरंत ही न्यूरोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है| 











सही शब्द न ढूंढ पाने के कारण छोटी सी बात बताने के लिए भी बहुत समय लेना आसान समस्याएं हल करने में दिक़्क़तकिसी भी चीज पर ध्यान देने की क्षमता में कमी आना
बदलता हुआ मूड 
रोज़मर्रा के साधारण कामकाज करने में मुश्किलआसपास इस वक्त क्या चल रहा है उसकी जानकारी न होना
उदासीनता और अलगाव
स्थान और समय का ज्ञान न रहनाबोलने और सही शब्द ढूंढ़ने में परेशानी
आसान से काम करने में दिक्कत
तस्वीरों को समझने या पहचानने में कठिनाईअनावश्यक चीजों पर ध्यान देना
असमंजस में पड़ जाना 
जानी पहचानी भाषा लिखने या बोलने की समस्याबड़बड़ाना या उल्टा-सीधा जवाब देना
बातों का क्रम न समझ पाना 
चीजों को किसी और की जगह पर रखना और ढूंढते समय परेशान होनानींद न आना
दिशाएं समझ पाना निर्णय क्षमता पर असरचिड़चिड़ापन
किसी चीज को दोहराना (ऐसा ऑब्सेसिव्ह कम्पलसिव डिसॉर्डर में भी होता है)
 

मनोदशा, बर्ताव और व्यक्तित्व में बदलाव  

 

डर, गुस्सा, तनाव या डिप्रेशन की चरम सीमा पर पहुँच जाना
नया सीखने में परेशानी
लक्षणों में उतार चढाव 
 

व्यवहार से जुड़े मानसिक विकार

कुछ मानसिक विकार व्यक्ति के बर्ताव में सुस्पष्ट बदलाव लाने के लिए जिम्मेदार होते हैं| बर्ताव में ये बदलाव आसानी से समझ में आ जाते हैं, परन्तु कई तरह के मानसिक विकारों में इनमें समानताएं नजर आती है| अतः बीमारी को पहचानना मुश्किल हो जाता है| आइये देखते हैं विभिन्न मानसिक बीमारियां जो व्यवहार से जुड़ी हैं: 
डिल्यूजन या भ्रम रोग (Delusional डिसॉर्डर)फोबिया या डर (Fobia) सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia)हैल्युसिनेशन या मतिभ्रम (Hallucination)व्यक्तित्व विकार 
अकेले रहनाडरावनी चीज देखके या याद करके असुरक्षित महसूस करना बात करते समय अलग शब्दों और वाक्यों का उपयोग 

 

परिचित या अपरिचित आवाजें सुनाई देना व्यवहार में एकाएक बदलाव (कुछ घंटों तक एक तरीके से पेश आना और कुछ ही मिनटों में मानसिकता बदल जाना)
असुरक्षित महसूस करना और ये सोचना कि अपने खिलाफ कोई साज़िश रची जा रही हैअकारण भय लग रहा है ये जानते हुए भी उसे नियंत्रित न कर पानाआवेगों को नियंत्रित करने में परेशानी जैसे की दुःख, गुस्सा, प्यार चीजें, व्यक्ति, रौशनी या पैटर्न दिखने का आभास दूसरे लोगों पर निर्भर रहना 
छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगडे करना
डरावनी चीजों से दूर रहने की कोशिश करना परिस्थितियों के लिए अजीब और भावनात्मक प्रतिक्रियाएंस्वाद, गंध या स्पर्श का काल्पनिक एहसास (यह लक्षण बहुत ही कम लोगों में दिखाई देता है) अलगाव 
अजीब आदतें जैसे की हमेशा खरोंचते रहना
तर्कहीन डर की वजह से रोज़मर्रा के काम न कर पाना किसी भावना को व्यक्त न कर पाना एकाएक गुस्सा करना 
ऑफिस में अजीब व्यवहार करना
भय की शारीरिक प्रतिक्रियाएं जैसे कि पसीना आना, धड़कने तेज हो जाना, मतली, सांस लेने में कठिनाई, घाव या खून देखके बेहोश हो जानासमाज से अलगाव  किसी करीबी व्यक्ति से अलग हो जाने का डर 
सामाजिक रिश्तों में समस्याएं
फोबिया में आमतौर पर निम्नलिखित चीजों या परिस्थितियों में डर लगता है:

जानवर, प्राकृतिक परिस्थितियां जैसे की ऊंचाई और पानी आदि, परिस्थितियां जैसे कि ड्राइविंग, सुरंग या कांच की दीवारें आदि, चोट लगने का डर

 

रोज़मर्रा की गतिविधियों में अरुचि बेहद आत्ममग्न होना 

 


 


 


 



आवेश में आना, भयभीत होना या खुद को नुकसान पहुँचाना 
आवेगों को नियंत्रित करने में परेशानी जैसे की दुःख, गुस्सा, प्यार 
लोगों पर भरोसा न कर पाना
दूसरों के प्रति भावनाशून्यता 

  

परेशानी से जुड़े मानसिक विकार

 
पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर, ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर्स, डिप्रेशन आदि मानसिक बीमारियों का मुख्य लक्षण है परेशानी| आइये देखते हैं परेशानी से जुड़े कुछ मानसिक विकार:
पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (PTSD)ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डरडिप्रेशन
घटना को बार बार याद करना या अपने आप को उस परिस्थिति में रखकर उसे फिर से जीनाजाँच या पुष्टि करना जैसे कि पानी का नल खुला तो नहीं हैअत्यधिक दुखी होना
उस घटना की यादों से दूर रहने की कोशिश करना संक्रमण के डर से बार बार सफाई करना
बिना किसी शारीरिक व्याधि के होने वाला दर्द
अचानक सदमे में चले जाना
पुरानी बेकार चीजे फेंक न पाना 
हर चीज से अलगाव और किसी चीज में दिलचस्पी न होना
भावनात्मक रूप से अलगाव 
पृथ्वी की उत्पत्ति या इस जैसे विषयों पर अत्यधिक चिंतन जिसका कोई निष्कर्ष न निकलता हो
समाज में किसी के साथ मिलना-जुलना न पसंद करना


दूसरों को या स्वयं को हानि पहुँचाने के बारे में हिंसक विचार
अचानक वजन बढ़ना या कम होना
वस्तुओं की रचना के क्रम पर अधिक ध्यान देना ताकि सब चीजें अच्छी और सुव्यवस्थित दिखें जीवन के बारे में नकारात्मक सोच और स्वयं को कम महत्वपूर्ण महसूस करना
















कमजोरी महसूस होना
नींद के समय में बदलाव
आत्म-सम्मान की कमी
व्यवहार या बोलने में धीमापन
शराब या ड्रग्स का अत्यधिक सेवन
आत्महत्या के विचार
थोड़े या ज्यादा समय के लिए स्मृतिभ्रंश
स्नान, दवाओं या भोजन को भूल जाना या उससे बचना, और अपने स्वयं के स्वास्थ्य की उपेक्षा करना
किसी भी बीमारी के लक्षणों को मध्यनजर रखते हुए से एक या दो से अधिक लक्षण एक बुजुर्ग व्यक्ति में पाए गएं तो उस व्यक्ति को जाँच की आवश्यकता है| किसी मनोचिकित्सक या न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाकर ऐसी समस्याओं का इलाज करना संभव है| अतः आप निम्नलिखित उपचारों का इस्तेमाल कर सकते हैं: 

सामान्य रूप से काम आते हैं ये उपचार

सम्मोहन

गंभीर मानसिक विकारों में अक्सर सम्मोहित कर के आघात की स्थितियों, यादों और भावनाओं को फिरसे जगाकर तनाव की स्थिति का सामना करने के लिए मदद की जाती है| इस लिए बार बार अतीत में जाकर व्यक्ति के तनाव या भय को मिटाने के लिए मनोचिकित्सक द्वारा एक्पोजर थेरपी का इस्तेमाल किया जाता है| 

एक्पोजर और कॉग्निटिव थेरपी

अगर मरीज को अतीत में घटी हुई घटनाओं या हादसों की वजह से जिंदगी पे पछतावा, अपराध की भावना, खुद को कोसते रहना, भविष्य की चिंता की वजह से परेशानी है तो कॉग्निटिव थेरपी का इस्तेमाल किया जाता है| इन उपचारों के दौरान मरीज के साथ बातचीत करके उसे बार बार खुद को माफ़ करने का अवसर दिया जाता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है| 

पॉज़िटिव थिंकिंग

सकारात्मक विचारों से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मरीज को काउंसिलिंग की जरुरत होती है| एक चिकित्सक की मदद से या परिवार के सदस्यों की मदद से आघात की दर्दनाक यादों को भुलाने के लिए मरीज को पॉजिटिव थिंकिंग के साथ साथ दीर्घ साँस लेकर नई उम्मीद जगाने की आवश्यकता होती है| 

टॉक थेरपी

मानसिक विकारों में मरीज को सुरक्षित वातावरण का एहसास देकर उसके साथ बातचीत करके किसी भी मानसिक विकार के प्रभाव को कम किया जा सकता है|

योग और मेडिटेशन (विपश्यना)

योग या मेडिटेशन के जरिए व्यक्ति को शांति का अनुभव होता है| केवल शरीर पर ध्यान देकर कुछ सरल योगासन किए जाते हैं| इससे बहुत ताजगी का एहसास होता है| मेडिटेशन के जरिए मन में आनेवाले बुरे और डरावने विचार दूर किए जा सकते हैं| 

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