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विश्व जनसंख्या एजिंग परिणाम के अनुसार, भारत एक वृद्ध होता हुआ देश है क्योंकि इसकी ७.७% आबादी ६० वर्ष से अधिक वृद्ध है. इसके अलावा, यह अनुमान लगाया गया है कि २०५० तक वृद्ध आबादी में लगभग १९% की वृद्धि होगी.

वृद्ध आबादी में वृद्धि के साथ, यह भी अनिवार्य हो जाता है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और सेहत के स्तर को बेहतर बनाने के लिए उपाय किए जाए.

चिकित्सा (मेडिकल) विज्ञान और प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) में और अन्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में प्रगति के साथ वृद्ध देखभाल में यह एक और क्षेत्र है, जिसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए. यही उनका प्रतिरक्षण है. बच्चों के तरह, वृद्धो को भी अपनी प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिए टीकाकरण की आवश्यकता होती है.

टीके बहुत महत्वपूर्ण हैं. बढ़ती उम्र के साथ उम्र के रूप में, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कमजोर होती है, और यह संक्रमण से लड़ने के लिए और अधिक समस्याग्रस्त हो सकती है.

लगभग १४ खत्रोंसे बुजुर्गों में उचित टीकाकरण के माध्यम से लड़ा जा सकता है.

भारत में, निम्नलिखित पांच टीकों को बुजुर्गों को अधिकतर दिए जाते है:

इन्फ्लुएंजा टीका: इस टीका में एक निष्क्रिय फ्लू वायरस होता है. प्रतिरक्षा प्रणाली इस निष्क्रिय वायरस का जवाब देती है और इसके खिलाफ एंटीबॉडी विकसित करती है. हर साल ६५ साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए उच्च खुराक इन्फ्लूएंजा टीका की सिफारिश की जाती है.

न्यूमोकोकल संक्रमण: टीका न्यूमोकोकस बैक्टीरिया के कारण निमोनिया के खिलाफ सुरक्षा करता है. वृद्धों के लिए ६५ वर्ष से अधिक उम्र के लिए टीका की सिफारिश की जाती है.

हरपीज ज़ोस्टर (शिंगल्स) टीका: यह शिंगल्स नामक एक दर्दनाक स्थिति के खिलाफ सुरक्षा करता है, एक ऐसी बीमारी जो दर्दनाक,  खतरनक लाल चकत्तोंका (रेश) का कारण बनती है. शोध अध्ययनों से पता चला है कि प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्मून सिस्टम) से आयु से साथ आने वाली कमजोरी निष्क्रिय वायरस को सक्रिय कर सकता है. इस बीमारी से ग्रस्त बुजुर्गों में अधिकांश उम्र ६० वर्ष या उससे अधिक हैं. इस कारण ६० साल की उम्र में एक बार इसकी सिफारिश की जाती है.

टीडीएपी टीके: ६५ वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में लोगों को टीडीएपी टीका का प्रबंध यदि न दिया हो किया जाना चाहिए. सीडीसी सिफारिशों के मुताबिक, सभी बुजुर्गों को हर १० साल में बूस्टर खुराक मिलनी चाहिए.

हेपेटाइटिस बी: भारत में, हेपेटाइटिस बी का प्रसार २ से १०% तक रिपोर्ट की गई है. हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक वायरस है जो यकृत को संक्रमित करता है. ६० वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गोमे में हेपेटाइटिस बी टीकाकरण के लिए एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो जाती है. इस टिके की उन बुजुर्गों के लिए सिफारिश की जाती है जो सार्वजनिक सुरक्षा कार्यकर्ता हैं और जो कार्यस्थल में खून के संपर्क में आते हैं.

इनके अलावा, कोलेरा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए के लिए टीकाकरण की भी सिफारिश की जाती है.

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