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२०१६ की जनगणना के मुताबिक भारत में १२१ करोड़ लोग वरिष्ठ नागरीक हैं| दुर्भाग्यवश ४३.३२ प्रतिशत वरिष्ठजनों को कोई न कोई मानसिक बीमारी है| उम्र के साथ साथ नर्वस प्रणाली की स्थिति दिन-बदिन कमजोर होती है| जिसकी वजह से कई तरह के शारीरिक बदलाव भी दिखाई देते हैं| सामान्य तौर पर भारतीय वरिष्ठजनों को होनेवाले मानसिक विकारों में ज्यादातर मूड में बदलाव (५५.३%) और मनोवैज्ञानिक विकार (३७.६%) (Psychotic Disorders) आदि सम्मिलित होते हैं| 

 मनोवैज्ञानिक विकार ५ मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किए गए हैं| 

  1. हैल्युसिनेशन
  2. डिल्यूजन
  3. अव्यवस्थित संभाषण (बिना किसी ठोस विषय के) 
  4. अव्यवस्थित बर्ताव 
  5. नकारात्मक लक्षण 

 मनोवैज्ञानिक विकार व्यक्ति की सोचने, निर्णय लेने, संवाद करने, समझने और उचित व्यवहार करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। अंतिम चरणों में ऐसे विकारों को काबू में रखना मुश्किल हो जाता है| ऐसे में मरीज को रोजमर्रा के काम करने में भी दिक्कत आती है| परन्तु कुछ गंभीर स्वरुप की मनोवैज्ञानिक बीमारियां उपचारों के जरिए ठीक हो सकती हैं|

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 मनोवैज्ञानिक विकारों को कैसे पहचानें

  • क्या मरीज में लक्षण दिखाई दे रहे हैं?
  • क्या मरीज के परिवार में किसी को यह विकार है? 
  • क्या इस विकार की वजह से मरीज पर नकारात्मक असर हो रहा है? 
  • विकार के कारण क्या हैं?
  • मरीज का देखभाल करनेवाले के साथ कैसा (चिड़चिड़ा, अजीब या प्यारभरा) बर्ताव है? 
  • क्या मरीज को बाकी परिवार से अलग रखा जा रहा है? 
  • क्या वो आसपास घटने वाली चीजों को समझ पा रहा है? 

मनोवैज्ञानिक विकारों के प्रकार

सिज़ोफ्रेनिया: भ्रम रोग (Delusional Disorder, डिल्यूजनल डिसॉर्डर) या हैल्युसिनेशन (Hallucination, मतिभ्रम) की वजह से वहम

सिज़ोअफेक्टिव डिसॉर्डर: सिज़ोफ्रेनिया की वजह से मूड में बदलाव

ब्रीफ सायकोटिक डिसॉर्डर: मानसिक आघात की वजह से एकाएक व्यवहार में बदलाव आना| परन्तु यह विकार ज्यादा समय तक नहीं रहता| ज्यादा से ज्यादा एक महीने तक इसका असर दिखाई देता है|  

डिल्यूजनल डिसॉर्डर: ऐसी चीजों पर विश्वास करना जो कि अस्तित्व में ही नहीं हैं| इस विकार की वजह से व्यक्ति भयभीत होता है| यह अवस्था कम से कम एक महीने तक बनी रहती है| 

शेयर्ड सायकोटिक डिसॉर्डर: इस मनोविकार में किसी एक व्यक्ति के मानने की वजह जो चीजें या व्यक्ति अस्तित्व में हैं ही नही उस पर दूसरा व्यक्ति भी विश्वास करने लगता है|  

किसी पदार्थ का सेवन बंद करने की वजह से सायकोटिक डिसॉर्डर: किसी दवाई या नशीले पदार्थों का सेवन एकाएक बंद करने की वजह से भ्रम रोग या हैल्युसिनेशन

शारीरिक बीमारी की वजह से सायकोटिक डिसॉर्डर: ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी की वजह से मस्तिष्क में स्थित ग्रे मैटर में रासायनिक असंतुलन 

 पैराफ्रेनिया: सिज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारी 

 मनोवैज्ञानिक विकारों के लक्षण

 मनोवैज्ञानिक विकारों में सामान्यतौर पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं| 

  1. बोलते समय असमंजस में पड़ जाना 
  2. असमंजस सोच 
  3. उल्टा-सीधा बर्ताव (चिड़चिड़ापन) 
  4. धीमी गति से गतिविधियां  
  5. स्वयं की स्वछता की ओर नजरअंदाजी 
  6. कोई भी काम करने में अरुचि 
  7. घर के सदस्यों एवं दोस्तों के साथ भावनाशून्य व्यवहार 
  8. मूड में बार बार बदलाव या डिप्रेशन जैसी मूड से जुड़ी हुयी बीमारी 

सही उपचारों के जरिए मनोवैज्ञानिक विकारों को ठीक किया जा सकता है| इन लक्षणों में से कोई २ लक्षण भी पाए गए तो तुरंत ही मनोचिकित्सक से परामर्श करें| ६ महीनों के योग्य उपचारों से मनोवैज्ञानिक विकारों के कई मरीज ठीक हो जाते हैं| 

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