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पीटीएसडी क्या है? 

पीटीएसडी (PTSD) या पोस्ट ट्रोमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (Post Traumatic Stress Disorder) यह एक मानसिक विकार है जिसमें अतीत में हुए आघात की वजह से व्यक्ति लम्बे समय के लिए या जीवनभर के लिए सदमे में चला जाता है| यह लगभग सभी उम्र के लोगों को होता है परन्तु, बुजुर्गों में इसकी तीव्रता अधिक होती है| 

यह आघात किसी भी प्रकार का हो सकता है| किसी करीबी व्यक्ति की मौत, कोई बड़ा विकार, दुर्घटना, अपने या किसी करीबी व्यक्ति के शरीर पर चोट ऐसे आघात के कारण होते है| इसके अलावा चोरी-डकैती, प्राकृतिक आपदा, आतंकवादी हमला, दंगे आदि कारणों की वजह से भी मानसिक आघात हो सकता है|  

कई सारे अभ्यासों के तहत प्राकृतिक आपदाओं के कारण बड़ी तादाद में बुजुर्ग लोग पीटीएसडी का शिकार बनते हैं| परन्तु प्राकृतिक आपदा के बाद बचाव कार्य में सिर्फ शारीरिक रूप से जख्मी लोगों को ही सहायता की जाती है| जिन व्यक्तियों को मानसिक रूप में आघात पहुंचता है, उनकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता| कुछ सालों पहले भारत में प्राकृतिक आपदा के बाद जो मानसिक आधार लोगों को जरुरी होता है उसकी ओर ध्यान दिया जा रहा है| 

इंडियन साइकियाट्रिक (मनोविज्ञान) सोसाइटी द्वारा जारी किए गए कार्यक्रमों में प्राकृतिक आपदा के बाद मानसिक आधार क्यों दिया जाना चाहिए इसका महत्व बताया जा रहा है| 

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बुजुर्गों में पीटीएसडी का हल है सपोर्ट ग्रुप्स 

किसी करीबी व्यक्ति की मृत्यु के कारण ज्यादातर बुजुर्गों को मानसिक रूप में चोट पहुंचती है| युवावस्था में दिल से मजबूत होनेवाले यही लोग, उम्र के साथ भावनिक रूप से कमजोर होते हैं अत: सदमें में चले जाते हैं| 

पुरानी यादों को दोहराकर दुखी रहनेवाले वरिष्ठ जनों को ऐसे सदमों से उभरने के लिए मानसिक आधार की जरुरत होती है| परिस्थिति की गहराई को समझकर ऐसे सपोर्ट ग्रुप्स सकारात्मक विचारों से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काउंसिलिंग करते हैं| एक चिकित्सक की मदद से या परिवार के सदस्यों की मदद से आघात की दर्दनाक यादों को भुलाने के लिए मरीज को पॉजिटिव थिंकिंग के लिए प्रोत्साहित करते हैं| 

भारत में पीटीएसडी के बारे में जनजागृति 

परन्तु भारत में आज भी मानसिक विकारों को लेकर एक गलत विचारधारा पाई जाती है| कोई व्यक्ति खुलकर अपने मानसिक विकार पे चर्चा करे तो उसे ये डर रहता है कि लोग उसे पागल समझकर मजाक बना सकते हैं| किसी मनोचिकित्सक की सलाह लेने के लिए बहुत कम लोग प्रोत्साहित करते हैं| 

वर्तमान में भारत में चैन इंडिया, वांद्रेवाला फाउंडेशन यह एक ऐसी संस्था है, जो मानसिक रूप से जख्मी पीड़ित महिलाओं के पुनर्वसन का काम करती है| भारत में लोगों को पोस्ट ट्रोमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के बारे में जानकारी देने की अत्यधिक आवश्यकता है| तभी सदमे का सामना करने वाले लोगों को पहचानकर उनका इलाज किया जा सकता है| 

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