कैसे करें माता-पिता के मानसिक स्वास्थ्य की दूरी से देखभाल

जब आप अपने बुजुर्ग माता-पिता से दूर रहते हैं तब आपको उनके लिए चिंता होना स्वाभाविक है। उनके शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल आसानी से रखा जा सकता है परंतु उनके मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए क्या आपने इंतजाम किया है? आइए देखते हैं ऐसे कुछ तरीके अपनाकर आप अपने बुजुर्ग माता-पिता का ख्याल दूर होकर भी रह सकते रख सकते हैं।

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उनसे रोज बातें करें:


अगर आप अपने माता पिता से दूर रह रहे हैं और आपको यह लगता है कि वे अवसाद या डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं तो बेहतर है आप उनसे फोन पर रोज बात करें। अक्सर बच्चे घर से दूर जाने के बाद बुजुर्ग माता-पिता ‘एम्पटी नेस्ट सिंड्रोम’ का शिकार बन सकते हैं। उनसे हमेशा बातें करते रहना उनको यह राहत दिलाता है कि उनकी किसी को जरूरत है। अगर उनके पोता-पोती उनसे वीडियो कॉल पर भी बात करें तो वे डिप्रेशन से बाहर आ सकते हैं।

घर में सेंसर्स बिठाए:

अगर आप के बुजुर्ग माता-पिता मानसिक विकृति या परेशानी के शिकार बन गए हैं तो ऐसे में संभव है कि उन्हें बार-बार लगे कि घर में कोई आ रहा है। घर में सेंसस बिठाने पर आपको यह पता चलेगा कि सचमुच कोई घर में आ रहा है या यह उनका वहम है।

उनके गतिविधियों पर ध्यान रखें:

कई बार डिप्रेशन में आत्महत्या के विचार बुजुर्ग माता-पिता के मन में आने की संभावना रहती है। ऐसे में अगर आपने घर में सीसीटीवी कैमरा सेट किया तो आप उनकी गतिविधियों पर ध्यान रख सकते हैं। दिल की धड़कन को ट्रैक करने वाला उपकरण आप उन्हें इस्तेमाल करने के लिए दे सकते हैं। अगर उनके दिल के धड़कने तेज हुई तो आप तुरंत ही कुछ जरूरी कदम उठा सकते हैं।

उनकी देखभाल के लिए कोई व्यक्ति देखें:

डिप्रेशन से गुजरने वाले बुजुर्ग माता-पिता के लिए देखभाल करने वाले व्यक्ति को नियुक्त करना बहुत ही आवश्यक पर उतनी ही कठिन बात है। उनके मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए ऐसे देखभाल करने वाले व्यक्ति को बहुत ही प्यार से और संयम से के माता-पिता के साथ पेश आना जरूरी है।

बार बार उनसे मिलने के लिए जाएं:

अपने बुजुर्ग माता-पिता को बार बार मिलते रहने से उन्हें यह महसूस होगा कि उनकी आपके लिए कितनी अहमियत है। अगर संभव है तो आप जब उनकी डॉक्टर के साथ अपॉइंटमेंट हो तब उनसे मिलने जाए ताकि आप उनके स्वास्थ्य के बारे में अधिक जानकारी ले पाओ।

सपोर्ट ग्रुप से मदद लें:

मानसिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिए दवाइयों के साथ सपोर्ट ग्रुप की भी आवश्यकता है। परंतु मानसिक विकृति या डिप्रेशन के मरीजों में किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करने की इच्छा नहीं होती। मानसिक विकृति से गुजरने वाले माता पिता को आप यह बता सकते हैं कि सपोर्ट ग्रुप उनके कितने काम आएगा। उनके मन में यह विश्वास जगाकर किसी सपोर्ट ग्रुप की मदद से आप उन्हें मानसिक विकृति से बाहर निकलने में उनकी सहायता कर सकते हैं।

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