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मानव के शरीर में शारीरिक क्रियाओं के लिए आवश्यक स्राव उत्पन्न करनेका काम 3 प्रकार की ग्रंथियाँ करती हैं।अंतःस्रावी (ग्रंथियाँ जो स्राव या हार्मोन का उत्पादन करती हैं), बहि:स्रावी (पसीना, मसूड़े) और मिश्रित (शरीर के भीतर और बाहर स्राव पैदा करने वाली ग्रंथियाँ)। मुख्य ग्रंथियों में से एक थायरॉयड है जो थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन करता है। शरीर के चयापचय की क्रिया में यह ग्रंथि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करनेवाले हाशिमोटो के रोग या आयोडीन की कमी, थायरॉयड के विकारों का कारण है।एक पत्रिका के अनुसार, ६० वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म का खतरा होता है। साथ ही, भारत में हर दस में से एक व्यक्ति को थायरॉयड का विकार है। भारत में ४२ दशलक्ष नागरीक थायरॉयड से जुड़ी बीमारियों का शिकार बने हैं, जिनमें से १३.१% नागरीकों की आयु ४६-५४ साल है। 

थायरॉयड एक अंतःस्रावी ग्रंथि है और आपने थायराइड के कई विकारों के बारे में सुना होगा। थायरॉयड विकार मुख्य रूप से ४५ साल की उम्र के बाद शुरू होते हैं। हमारे देश में ऐसा माना जाता है कि थायरॉयड विकार वाले लोग मोटे हो जाते हैं, लेकिन वास्तव में इस विकार के दो प्रकार हैं। हाइपरथायरॉयडिज्म (थायरोक्सिन का अधिक उत्पादन) और हाइपोथायरॉयडिज्म (थायरोक्सिन का कम उत्पादन)। इनमें से, सिर्फ हाइपोथायरॉयडिज्म मोटापे से जुड़ा हुआ है।हाइपोथायरॉयडिज्म की वजह से कोशिकाओं में चयापचय गतिविधि हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण धीमी हो जाती है और परिणामस्वरूप कोशिकाओं के कार्य को धीमा कर देती है।

आइए देखें कि हाइपोथायरायडिज्म को कैसे पहचाने:

  • थकान
  • बार बारनींद आना
  • विस्मरण
  • वजन बढ़ना
  • बार बार मूड बदल जाना
  • डिप्रेशन
  • मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द
  • दुर्बलता
  • पसीना कम आना
  • ब्लड प्रेशर में बदलाव
  • कोलेस्ट्रोल का बढ़ना
  • पैरों की सूजन
  • चिढ़चिड़ापन
  • दुर्बलता
  • कमजोर नजर
  • कठोर या खरछरी आवाज बदलना
  • रूखे बाल और त्वचा
  • बालों का झड़ना
  • कब्ज

वरिष्ठ नागरीकों में थायरॉयड विकारों की वजह से बढ़ा हुआ मोटापा कम करने के लिए कुछ खास सुझाव:

  • नियमित व्यायाम के साथ, अपने आहार को थोड़ा कम करें और इसके बजाय उबली हुई सब्जियां, सलाद खाएं।
  • भले ही नमक में आयोडीन होता है, लेकिन नमक का अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है। इसलिए, डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही नमक का किस प्रमाण में सेवन करना है यह सुनिश्चित करें।
  • ग्रीन टी का उपयोग वजन कम करने के लिए किया जाता है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है।लेकिन थायरॉयड विकारों में ग्रीन टी घातक साबित हो सकती है। इसलिए इस विषय में डॉक्टर से सलाह लें।
  • दवा में अनियमितता होने के कारण से थायरॉयड का विकार बढ़ सकता हैं। इसलिए समय पर दवा लें और दवाई लेना भूलें। 

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आप आहार में क्या बदलाव करेंगे?

  • आप शकरकंद, आलू खा सकते हैं क्योंकि इसमें पोटैशियम की मात्रा ज्यादा रहती है|
  • सफेद चावल की बजाय ब्राउन राइस खाएं।
  • अगर आप मांसाहारी हैं, तो मछली खाएं क्योंकि इसमें ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है।
  • अंकुरित अनाज और दालों का उपयोग करें। इसमें फाइबर की मात्रा अधिक रहती है|
  • बी विटामिन के लिए दही, दूध, फलों का रस, सूखे मेवों का सेवन करें।

क्या न खाएं?

  • गोभी, सोयाबीन, कैफीन या ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थ और मीठे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।

उपचार से थायरॉयड की बीमारी ठीक हो सकती है। इसलिए, थायरॉयड के कारण बढ़ने वाले वजन को कम करने के लिए अपनी आदतों को बदलकर, आप खुद को एक स्वस्थ जीवन जीने का अवसर दे सकते हैं।

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